राज्य -छत्तीसगढ़ ,जिला -कोरिया
शीर्षक -'कोरोना को हराना है'
'कोरोना को हराना है'
प्रलय मचा रहा भयंकर, कोरोना का महा दानव।
असहाय और निरीह सा, खड़ा है मानव।
सुरसा के मुख की तरह, बढ़ा रहा आकार।
इधर है करुण क्रंदन, उधर हाहाकार।
सावधान!इसके चंगुल में नहीं आना है,
कोरोना को हराना है।।
प्रस्तुत है समक्ष हमारे, इस निमित्त कुछ आचार संहिता।
आत्मसात करो बस इनको ,फिर न कोई भय ,न चिन्ता।
तन से रहना दूर, मन से बहुत पास।
तब ही हो पाएगा, इस दनुज का सर्वनाश।
करके अपना बचाव , देश बचाना है ,
कोरोना को हराना है।।
रणबांकुरे जो रण में हैं ,निडर, निर्भय ,सहर्ष।
वंदनीय हैं, पूजनीय हैं ,सादर चरण स्पर्श।
शत्रु है बलशाली बड़ा ,क्रूर, सूक्ष्म, अदृश्य।
सीना तान फिर भी खड़े, देवदूत सा नित्य।
शौर्य इनका पराक्रम इनका, सुनना और सुनाना है ,
कोरोना को हराना है।।
तुम करो बस अपनी रक्षा, देश रक्षा हो जाएगी स्वत:।
कह रही संतानों से अपनी, मां भारती वस्तुतः।
परख रहा यह आपद, किसमें कितना धीर है ।
सजग हो जाओ हे मानव श्रेष्ठ! घाव बड़ा गंभीर है।
सोच यही विचार यही, गाना और गुनगुनाना है ,
कोरोना को हराना है।।
बिजेन्द्र अहीर
Vaah guru 👌👌
ReplyDeleteबेहतरीन
ReplyDeleteNice ji
ReplyDeleteBahut sunder👌👌
DeleteVery good
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