राज्य- दिल्ली
कविता का शीर्षक- कोरोना का चमत्कार
कविता
धन्य धन्य आप धन्यवाद परमात्मा जी
आपने जो जग में ये महामारी लाई है,
भटक रहे थे सारे ,आत्मा को मारे मारे
डर से ही सही सबकी आत्मा जगाई है।
शुरू में तो सबने ने मज़ाक भी बनाया बड़ा
अब आई समझ जो जां पर बन आई है,
माता पिता ,भाई बन्धु ,दोस्त यार अपनों की
सारे रिश्तों की हमें याद भी दिलाई है।
त्राहि त्राहि माम करें ,दुनिया तमाम डरे
कोरोणा ने अक्ल ठिकाने पर लगाई है,
मेरी प्यारी सासू मां भी बेटी की बड़ाई छोड़
बहू चुनने के फैसले पे इतराई है।
लॉक डॉउन चलते जों कामवाली आई नहीं
बच्चो ने भी घर में मदद करवाई है,
इतना ही ही होता यदि,खुश नहीं होती कभी
पहली बार सुनो जी ने चाय बनाई है।।
बहुत सुंदर अभिव्यक्ति।
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