राज्य- छत्तीसगढ़, जिला- कोरिया
विधा- ग़ज़ल
मोबाइल- 7049391780
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मत पूछ मेरे यार,तेरे याराने को हमने किस कदर सम्हाल रखा है,
तेरी खूबियाँ बताते हैं हर किसी को,तेरी खामियों पर पर्दा डाल रखा है।
और किसी को जरा सी भी भनक नहीं, इस बारे में,
महज दोस्तों को पता है,मैंनें जो मनसूबा पाल रखा है।
झूठ, फरेब ,बेईमानी, थोड़ी बहुत मुझमें भी हैं मगर,
दोस्तों के मसले पर इन्हें, नियत से बाहर निकाल रखा है।
विश्वास न हो तो,पूछ लो उनसे, जो मेरे दुश्मन हैं,
दुश्मनी के बावजूद मैंने उनका,दोस्तों जैसा ख्याल रखा है।
क्या हुआ अगर मेरे पास ,दौलत की चादर नहीं,
बहुत जतन बहुत हिफाज़त से मैंने, दोस्ती का रूमाल रखा है।
पेश आया है जब भी ,बिल्कुल पाक साफ आया है,
दोस्तों के वास्ते इस दिल ने, कहाँ शिकवा, शिकायत और मलाल रखा है।
बिजेन्द्र अहीर
Nice GHAZAL
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