राज्य-पश्चिम बंगाल
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“ काश अगर मैं नेता होता”
काश अगर मैं नेता होता
जनता का सेवक कहलाता है
आगे पीछे चमचे होते
स्वागत में सब लोग दौड़ते
यहाँ पर भाषण वहाँ पर उद्घाटन
चर्चा में हर रोज मैं होता
काश अगर मैं नेता होता
कहीं पर हिंदू कहीं पर मुस्लिम
कहीं पर ऊंच कहीं पर नीच
का झगड़ा लोग रोज लगाता
सांप्रदायिकता फैला कर
एकता पर भाषण देता
काश अगर मैं नेता होता
स्थान ,खंड ,और लैंड
के लिए लोगों को उकसाता
देश जाये भाड़ में
मेरा नाम तो हो जाता
जातिवाद फैला कर
देश की रक्षा करता है
काश अगर मैं नेता होता है
जी तो नहीं करता फिर भी
मौज-मस्ती की खातिर
विदेशी न सही देसी बैंक में ही
कुछ बैलेंस बनाता
देश दब जाए भले कर्ज के बोझ से
मैं करोड़पति हो जाता है
काश अगर मैं नेता होता
कत्ल भी पड़े अगर किसी का करवाना
या पड़े किसी का झोपड़ा जलाना
ये सब कुछ भी करवाकर
मैं अपनी कुर्सी बचाता
जांच के लिए अपने ही लोगों का
एक कमीशन बैठाता
इस तरह जनता को उल्लू बनाता
विकास के नाम पर
प्रगति के पथ पर
गरीबों की झोपड़ी उजड़वाकर
फाइव स्टार होटल बनवाता
बाहर भूख से बिलबिला बच्चे
और चीखती चिल्लाती जनता
भीतर मैं चियर्स का आनंद लेता
काश अगर मैं नेता होता
मुख्य अतिथि के रूप में
हिंदी दिवस के अवसर पर
मुझे बुलाया जाता
जोरदार भाषण इंग्लिश में देकर
हिंदी को बढ़ावा देता
हिंदी को माफ करेंगे
हिंदी बोलने की आदत नहीं है
कह कर मैं क्षमा मांग लेता
कह कर मै क्षमा मांग लेता
काश अगर मैं नेता होता
जनता का सेवक कहलाता
काश अगर मैं नेता होता है
जनता का सेवक कहलाता
दिनेश चन्द्र प्रसाद "दीनेश" कलकत्ता
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