रचनाकार: विश्वनाथ देवांगन'मुस्कुराता बस्तर'
संपर्क: 7999566755
शीर्षक: महुआ
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"महुआ"
हरी भरी वादियां,
पक्षियों का कलरव,
हरे भरे पेड़,
पतझड़ और सावन,
महुए की टोकरी,
पसीने से तर ब तर,
खिल खिलाता जीवन |
गिरे महुओं को बीनते,
थककर 'मंडिये' का पेज,
'चपोड़ा' की चटनी,
'कांवड़' लेकर रोज,
प्रकृति की गोद में,
मुस्कुराती जिन्दगी |
'तेंदू' का मुंह लटकाना,
'चार' का हूं..इतराना,
'चैतू' का 'ढुटी', 'टंगिया',
'मोहन' का वाट्सअप,
महुए की डाल पर,
नेटवर्क का चहचहाना |
माडर्न महुए से मोबाइल,
'सरगी' की फूल की स्माइल,
गांव का शहर कनेक्शन,
'बूबा' से पापा का मेन्शन,
सूखा 'भेलवां' का इतिहास,
महुए तू ही बता,
क्यों हैं तू अब उदास ?
मौन पेड़ों की ओट से,
छुपकर खेत की लाड़ी में,
मिलन को आती 'मनकी',
कहीं छुप जाना,
मन मसोस कर याद आना,
महुआ का अपना,
भविष्य देख,सिसक कर रोना |
- विश्वनाथ देवांगन'मुस्कुराता बस्तर'
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