Tuesday, April 7, 2020

उप्र से जितेन्द्र"हमदर्द" की रचना- भूखमरी

जितेन्द्र"हमदर्द"
उत्तर प्रदेश
भूखमरी
8953191518

*भुखमरी*
वो मासूम सा, खुद पर रोता रहा।
भूखे पेट ही खुद से लड़ता रहा।

जो उमीदें थी उसकी खत्म हो गयी।
चाहत उसकी ही,अब जख़्म हो गयी
बेबस भूखे पेट रोज सोता रहा।

वो मासूम सा, खुद पर रोता रहा।
भूखे पेट ही खुद से लड़ता रहा।

ख़ुदा कैसे लिखा मेरी किस्मत को।
अब कुछ ना रहा,तेरी ख़िदमत को।
परिवार की ख़ातिर खुद को बोता रहा।

वो मासूम सा, खुद पर रोता रहा।
भूखे पेट ही खुद से लड़ता रहा।

धूप कड़ी थी मेहनत करता गया।
भूखे बच्चें ना सोये पाई जोड़ता गया।
दो जून की रोटी को तरसता रहा।

वो मासूम सा, खुद पर रोता रहा।
भूखे पेट ही खुद से लड़ता रहा।

कैसे गुजरते है ये दिन ना पूछो खुदा।
लाचारी से अच्छा दुनिया से कर दे जुदा।
राह दिखा दे मुझे विनती करता रहा।

वो मासूम सा, खुद पर रोता रहा।
भूखे पेट ही खुद से लड़ता रहा।
✍️✍️✍️जितेन्द्र"हमदर्द"

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