बाँदीकुई(दौसा)राज.
शीर्षक- परशुराम
जमदग्नी के पुत्र थे, परशुराम कहलाय।
मात रेणुका गर्भ से, जन्म भूमि पर पाय।।
शुक्ल तीज वैशाख में, प्रगट हुए संसार।
मात पिता के भक्त थे, ब्रह्म तेज साकार।।
शस्त्र शास्त्र के ज्ञान में,उनके नही समान।
फरसा धारे हाथ में, कभी न छोड़ी आन।।
गुरुवर विश्वामित्र से, लिया शास्त्र का ज्ञान।
कश्यप और ऋचीक से,शस्त्र ज्ञान महान।।
शिवशंकर की भक्ति कर,पा लिया परशुअस्त्र।
जन्मे ब्राह्मण वंश में, धारे क्षत्रिय शस्त्र।।

No comments:
Post a Comment