राज्य-उत्तर प्रदेश
कविता का शीर्षक-विकलांगता पर दोहे
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दोहे
जो भी अपने हौसले, रखते अगर बुलंद।
रचता वो संसार में, नए-नए नित छंद।।
फर्जी बढ़ती जा रही, विकलांगो की भीड़।
इसीलिए मिलता नहीं, इनको अपना नीड़।।
क्षमता अपनी कम नहीं, कम समझें बस आप।
करने में होते सफल, दूर सदा संताप।।
दिखते हम विकलांग पर, मन से हैं मजबूत।
देखो जी संसार में, मिलते कई सबूत।।
जन्म दिया जो ईश ने, उससे है संतोष।
करें घृणित व्यवहार जब, होता है तब रोष।।
रोष उसी पल दाब लें, लेते ईश्वर नाम।
भगवन देते हैं उसे, फिर सार्थक परिणाम।।
शब्द दिया दिव्यांग जो, तुरत गए हम रीझ।
समझें हमको वोट बस, देख हमें वो खीझ।।
हमें कहा दिव्यांग जो, आप हुए मशहूर।
दर्द नहीं पर पूँछते, भाषण दे भरपूर।।
भाषणबाजी से सुनो, भूख मिटे क्या आज।
तबियत होती ठीक क्या,मिलता नहीं इलाज।।
बहुत सुंदर
ReplyDeleteअच्छी रचना। शुभकामनाएं।
ReplyDeleteThanks
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