राज्य- छत्तीसगढ़, जिला-कोरिया
विधा- ग़ज़ल
मो : 7049391780
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तुम्हें पहलू में पाकर,खूब इतराना चाहती है,
अब आ भी जाओ,जिन्दगी मुस्कुराना चाहती है।
तंग आ चूकी खुद भी शायद, मुझे तंग करते-करते,
यकीन करो तन्हाई मुझसे,अब दूर जाना चाहती है।
दौर बीत चूका वो,जब मैंने महज खोया ,
कायनात मुझे अब , देना और दिलाना चाहती है।
वो पुरानी बात थी,गुंजाइश नही अब गुमराह होने की,
खबर है राह मुझे इस बार, खुद राह दिखाना चाहती है।
मेरी चाहत मेरी हसरत को,समझ चूकी है बखूबी,
सुनने को आया है कि खुशहाली ,मुझसे यारी निभाना चाहती है।
आया है पैगाम उसका, हवाओं और फिजाओं के मारफत,
ये सच है दोस्तों!मंजिल मेरी मुझसे, आंँख मिलाना चाहती है।
बिजेन्द्र अहीर
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