राज्य - उत्तर प्रदेश
कविता का शीर्षक - कोरोना और किसान
संपर्क नंबर - ७३१०२२५०६९
बंधु दूर जाना नहीं, छोड़ कहीं घर आप।
नीच करोना है अभी, बना हुआ अभिशाप।।
कलयुग भी अब देखिए, करने लगा धमाल।
वंशीधर अवतार लो, विपदा बड़ी कराल।।
कोरोना के चक्र से, बचा न कोई आज।
चाहे कोई रंक हो, चाहे हों सरताज।।
होरी धनिया साल भर, करते अन्न सलाह।
भगवन गर रूठे नहीं, करें सुता का ब्याह।।
औसत लो प्रतिवर्ष का, हुआ तिहाई अन्न।
देख दशा निज राशि की, कृषक हुआ है सन्न।।
रहें न पीछे आजकल, बनिये भी इस दौर।
चूसे खून गरीब का, और निगलते कौर।।
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