Monday, April 13, 2020

राजस्थान से महेंद्र परिहार "माही" की रचना

नाम :- महेंद्र परिहार "माही"
व्याख्याता (संस्कृत)
पीपाड़ शहर ,जोधपुर 
राज्य :- राजस्थान 
कविता का शीर्षक :- इंसानियत

सम्पर्क :- parihar.ms1990@gmail.com



शीर्षक :- इंसानियत

इंसान  इंसान  को  मार   रहा 
जानवरों  को  जिंदा  खा रहा 
नही बची इंसानियत  जहां में
मानव  दानव  हुआ  जा  रहा ।

मन्दिर  मस्जिद  को  बना रहा 
इंसानियत  को  भूले  जा  रहा 
नही  बचती  कोख़  में  बेटियां
जिंदा बेटीयाँ जलाए  जा  रहा 

चोरी  लूटपात  बढ़ता  जा रहा 
दिलों से  रिश्ते मिटता  जा रहा  
छोड़ते नही  मासूम  बेटीयों को 
हैवानियत  पार  किये  जा  रहा

धर्म  का ऐसा  नक़ाब पहन रहा 
भाई को  भाई नही पहचान रहा
नाम धर्म से  करते  खून खराबा
पाखंड धर्म का  फैलाये जा रहा

स्वार्थ  में  अंधा  हुआ  जा  रहा 
प्रकृति का  हरण किये  जा रहा 
न छोड़ा  क़ुदरत की उपहार को
बर्बाद   इसको   किये  जा  रहा ।।

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