०२. राज्य-नई दिल्ली,साकेत
०३. कविता का शीर्षक-कुदरत की शक्ति
०४. सम्पर्क नम्बर-
दिखाई आज कुदरत ने
तेरी हस्ती ,मेरी हस्ती
थमा ये शहर है सारा,
पड़ी ख़ामोश हर बस्ती
भले ही संग अपने हैं
जिन्हें हम प्यार करते हैं
मगर चेहरे पे ना मुस्कान
दिखती, ना कोई मस्ती।
मगर ये वक्त है यारों
यकीनन बीत जाएगा,
गमों की शाम हारेगी,
उजाला जीत जाएगा,
ज़रा रफ्तार को गर थाम लो
अपनों की खातिर तुम
यकीं मुझको ,ज़माना कल
खुशी के गीत गाएगा।
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