Monday, April 20, 2020

असम से पंकज मिश्र 'अटल ' की रचना- दिखी झांकती दूरी है

आपका नाम            - पंकज मिश्र 'अटल '
02 - राज्य                      - असम
03 - कविता का शीर्षक    - " दिखी झांकती दूरी है " 
04 -  संपर्क नंबर             -  7905903204

" दिखी झांकती दूरी है "
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अब अतीत को
ढोना बहुत जरूरी है।
वर्तमान में
जीना भी मजबूरी है।

सुबह का सूरज
मैला- मैला सा लगता।
आंखों में कोई उसके
सपना जलता।
ढेरों बार लिखा है खुद को
फिर भी व्यथा अधूरी है।

कुछ कहने से पहले सारे,
शब्द हुए गूंगे।
छिटके सारे अर्थ,
कि हों मोती, मूंगे।
अपनेपन में
दिखी झांकती दूरी है।

कितनी बार
स्वयं को मांजा, धोया है।
फिर भी लगता
मानों कुछ तो खोया है।
संवादों के मध्य,
ज़िंदगी पूरी है।

@ पंकज मिश्र 'अटल '

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