Monday, April 20, 2020

मध्यप्रदेश से हर्षित भारद्वाज 'धीर' की रचना- 'कलाम, आज उनकी जय बोल'

नाम- हर्षित भारद्वाज 'धीर'
राज्य- मध्य प्रदेश
कविता का शीर्षक- 'कलाम, आज उनकी जय बोल'
सम्पर्क नम्बर- 9691578504



पीकर जिनकी लाल शिखाएँ
उगल रही सौ लपट दिशाएँ
जिनके सिंहनाद से सहमी
धरती रही अभी तक डोल
कलम, आज उनकी जय बोल...

हौंसलों से भरी उड़ानें
नभ में लिखी शौर्य गाथाएँ
आसमानों की सीमा में
साँसें भी दी अपनी तौल
कलम, आज उनकी जय बोल...

पानी में चट्टान सा बनकर
संभाली हैं जल सीमाएँ
जिन वीरों की अमर कथाएँ
सागर भी गाता जय बोल
कलाम, आज उनकी जय बोल...

ना चाहें नाम ना दौलत कुछ
मिट्टी और ध्वज का मान रहे
एक यही धरम जिनका अनमोल
कलम, आज उनकी जय बोल...


व्याख्या: यह कविता मेरी ओर से एक धन्यवाद और नमन है उन फ़ौजियों के लिए जो अपना सब कुछ त्याग कर भी नि:स्वार्थ भाव से इस मिट्टी के लिए सरहद पर तैनात हैं| मेरी यह कविता किसी एक फ़ौजी भाई तक भी यदि पहुँच पति है तो मैं स्वयं को कृतार्थ समझूंगा| कोई त्रुटी हो तो क्षमा करें|

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