मध्य प्रदेश
शीर्षक - अपने गांव की ओर।।
8103536330
अपने दुख अपने साथ लिए बिना मंजिल के
वो पैदल चल पड़े है
अपने गांव की ओर।
कुछ शहरी तो अपने ही देश में पराए निकले
तो फिर पैदल चल पड़े
अपने गांव की ओर।
अंग्रेजो के जमाने की रैले,
हमारे जमाने की बसों के बिना
हम पैदल चल पड़े
अपने गांव की ओर।
शहर में मर गए तो कोई छूने भी नहीं आयेगा
गांव में जला तो देंगे लोग
इस लिए पैदल चल पड़े
अपने गांव की ओर।
हमारा हक हमको कभी नहीं मिलेगा पता है हमें
तो फिर आगे
चल पड़े पैदल
अपने गांव की ओर।
आज भी हिन्दू मुस्लिम की डिबेट में उलझे है पत्रकार
गरीबी से थोड़ी किसी का वास्ता
अब तो चलना ही था पैदल
अपने गांव की ओर।
हजारों सालों का इतिहास है हमें पता है कुछ नहीं होता गरीबों के सवाल का
तो फिर हमें चलना ही था पैदल
अपने गांव की ओर।
- गुणवंत मेघवाल
( बोल की लब आजाद हैं तेरे)
COVID - 19 की वजह से जो लॉक डाउन हुआ है।
जो मजदूर अपने घर नहीं जा पाए है उनकी ओर से।
आज सवाल नहीं किया जाएगा तो फिर कल किसका होगा?
No comments:
Post a Comment