Monday, April 13, 2020

मध्यप्रदेश से संजय पटेल की रचना- जिक्र तुम्हारा

संजय पटेल
०२. मध्यप्रदेश  
०३. जिक्र तुम्हारा 
०४. 9993494545

जिक्र तुम्हारा

जलता हुआ सूरज
एक ऑधी से बुझ गया

जैसे आसमान पर रखा चॉद
बादलों की भीड़ में खो गया

जैसे बगीचे में खिला फूल
भरी दोपहरी तोड़ कोई ले गया

जैसे चाय की तलब हुई
और दूध सारा खौल बह गया

जैसे सहेज कर रखा इक पल
गुम होती याददाश्त ने पी लिया

जैसे ऑखों से एक कतरा गिरा
बरसते पानी में खोजे न मिला

जैसे लिखने का बड़ा मन किया
पर शब्द कोई चुरा ले गया

जैसे सच होता एक सपना था
और नींद से किसी ने जगा दिया

जैसे उम्र का कोई साल बढ़ा
और सारा बचपन ही गुम हुआ

जैसे नन्हा शबनम का टुकड़ा
दिन के उजाले में खो गया

जैसे आव़ाज दी तमाम उम्र
कोई अनसुना कर चला गया

जैसे सारे किस्सों में जिक्र तुम्हारा
और किस्सा ही खत्म हुआ
                             संजय

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