०२. मध्यप्रदेश
०३. जिक्र तुम्हारा
०४. 9993494545
जिक्र तुम्हारा
जलता हुआ सूरज
एक ऑधी से बुझ गया
जैसे आसमान पर रखा चॉद
बादलों की भीड़ में खो गया
जैसे बगीचे में खिला फूल
भरी दोपहरी तोड़ कोई ले गया
जैसे चाय की तलब हुई
और दूध सारा खौल बह गया
जैसे सहेज कर रखा इक पल
गुम होती याददाश्त ने पी लिया
जैसे ऑखों से एक कतरा गिरा
बरसते पानी में खोजे न मिला
जैसे लिखने का बड़ा मन किया
पर शब्द कोई चुरा ले गया
जैसे सच होता एक सपना था
और नींद से किसी ने जगा दिया
जैसे उम्र का कोई साल बढ़ा
और सारा बचपन ही गुम हुआ
जैसे नन्हा शबनम का टुकड़ा
दिन के उजाले में खो गया
जैसे आव़ाज दी तमाम उम्र
कोई अनसुना कर चला गया
जैसे सारे किस्सों में जिक्र तुम्हारा
और किस्सा ही खत्म हुआ
संजय
Very nice
ReplyDeleteBahut sundar
ReplyDeleteबहुत शानदार
ReplyDeleteMasha allah.... Hmesa ki tarah Bhut shandar😍😍😍😍😍
ReplyDelete👌👌
ReplyDeleteBhut khub
ReplyDeleteBahut badiya
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