State : उत्तरप्रदेश
Title : तू खुद को क्या समझता है
Contact : 7754014167
कतमी सा भी वज़ूद नहीं है इंसान
तू खुद को मेराज़ समझता है ! ! !
चंद लक़ीरें क्या पढ़ ली हाथो की
तू खुद को भगवान् समझता है ! ! !
खुराफ़ाते क्या करने लगा अपनों से
तू खुद को शैतान समझता है ! ! !
दो गज़ ज़मीन का मालिक नहीं है
तू खुद को तुर्रमखॉन समझता है ! ! !
चिराग़ की रौशनी मयस्सर होती है नसीब से
तू चांदना को अपनी ज़ायदाद समझता है ! ! !
एक रोज़ रोटी खिला दी मोहताज़ को
तू खुद को मददगार समझता है ! ! !
तेरा वक़्त तेरे मुताविक़ क्या चला
तू खुद को परवरदिगार समझता है ! ! !
आईने ने तुझको जरा खूबसूरत दिखा दिया
तू खुद को खूबसूरती की मिसाल समझता है ! ! !
जरा मदद क्या कर दी जरूरतमंद की
तू बेबजह खुद को खुदा समझता है ! ! !
जरा दिमाग का बहम दूर कर तू
और बता तू खुद को क्या समझता है ! ! !
~दीपक श्रीवास्तव "दीपू"
No comments:
Post a Comment