Wednesday, April 8, 2020

उत्तरप्रदेश से दीपक श्रीवास्तव "दीपू" की रचना

Name : दीपक श्रीवास्तव "दीपू"
State : उत्तरप्रदेश
Title : तू खुद को क्या समझता है 
Contact :  7754014167



कतमी सा भी वज़ूद नहीं है इंसान 
तू खुद को मेराज़ समझता है ! ! !

चंद लक़ीरें क्या पढ़ ली हाथो की 
तू खुद को भगवान् समझता है ! ! !

खुराफ़ाते क्या करने लगा अपनों से 
तू खुद को शैतान समझता है ! ! !

दो गज़ ज़मीन का मालिक नहीं है 
तू खुद को तुर्रमखॉन समझता है ! ! !

चिराग़ की रौशनी मयस्सर होती है नसीब से 
तू चांदना को अपनी ज़ायदाद समझता है ! ! ! 

एक रोज़ रोटी खिला दी मोहताज़ को 
तू खुद को मददगार समझता है ! ! ! 

तेरा वक़्त तेरे मुताविक़ क्या चला 
तू खुद को परवरदिगार समझता है ! ! ! 

आईने ने तुझको जरा खूबसूरत दिखा दिया  
तू खुद को खूबसूरती की मिसाल समझता है ! ! ! 

जरा मदद क्या कर दी जरूरतमंद की
तू बेबजह खुद को खुदा समझता है ! ! ! 

जरा दिमाग का बहम दूर कर तू 
और बता तू खुद को क्या समझता है ! ! ! 

                            ~दीपक श्रीवास्तव "दीपू"

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