Wednesday, March 11, 2020

छत्तीसगढ़ से एस के नीरज की रचना- होली का बदलता स्वरूप

रचनाकार - एस के नीरज
राज्य - ३६ - गढ़
शीर्षक :--  होली का बदलता स्वरूप

गिरगिट भी रंग बदलने से डरने लगे हैं
अब तो होली के रंग भी फीके लगने लगे हैं ।

 नगाड़ों के थाप की आवाज  सुनाई नहीं देते 
अब तो होलिका भी खुद से जलने लगे हैं ।

युवकों की टोली कहीं दिखाई नहीं देते
नशे की गिरफ्त में सब ढलने लगे हैं ।

फाग के गीत भी जाने खो से गए हैं 
डी जे के गीत अब तो हर जगह बजने लगे हैं ।

लोगों में उमंग उत्साह अब दिखाई नहीं देता
होली के डर से सब घर में दुबकने लगे हैं ।

           एस के नीरज

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...