राज्य- दरभंगा बिहार
शीर्षक- पतंग
*पतंग*
आज किसकी पतंग कब कट जाये
ये खबर नही होती
बिन आत्मा शरीर मे जिन्दगी
की बसर नही होती।
क्या कहूँ कि इस
पतंग के किस्से किस तरह के
उड़े आसमां में
कभी तो कभी गिरे धरती पर कट के ।
कभी किसी खंभे पर लटके
कभी लिपटे पेड़ों के ऊपर
आँख मिचौनी खेले खेल
पत्तों के झुरमुट में छुप छुप।
जीवन भी होता है ऐसा
पतंग किसी की काटे कोई
कभी कभी होता है ऐसा
किसी को खुशियाँ बाँटे कोई।
कंचन प्रभा
अति उत्तम.
ReplyDeleteशुभकामनाओं के साथ.......रूसो सेन गुप्ता
ReplyDeleteBahut hi khubsurat rachna
ReplyDeleteThanks to all
DeleteBahot khoob
ReplyDeleteHamesha ki tarah bahut sundar
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