राज्य-पश्चिम बंगाल
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शीर्षक-"प्रकृति का बदला"
काट डाले हम पेड़ कितने
उजाड़े कितने उपवन
ले रही प्रकृति जब बदला
क्यों बौखलाता है मन
समतल किये पहाड़ कितने
उजाड़े कितने जंगल
करवट ले रही जब पृथ्वी
तब क्यों हो रहा है दंगल
अपनी सुख की खातिर हमने
भर दिए कितने पोखर तालाब
रो रहा है क्यों अब मानव
जब प्रकृति मांग रही है जवाब
कचरे से भर दिए हमने
नदियों और सागर को
पीने के लिए शुद्ध पानी नहीं
अब क्यों फोड़ रहे गागर को
लगाए नहीं दस बीस पेड़ हम
बच्चों की लाईन लगाए हैं
मांग रही जब प्रकृति बलिदान
हम क्यों सर झुकाए हैं
दिनेश चंद्र प्रसाद"दीनेश" कलकत्ता
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