Wednesday, March 11, 2020

छत्तीसगढ़ से सुधांशु श्रीवास्तव "जीत" की रचना- रंग लगाएंगे

नाम- सुधांशु श्रीवास्तव "जीत"
पता- दुर्ग (छत्तीसगढ़)
मोबाइल- 9691147957
शीर्षक- रंग लगाएंगे


                ***रंग लगाएंगे***

आ रही है होली नज़दीक, धूमधाम से मनाएंगे।
जो खुद जलने लायक हैं वो भी होली जलाएंगे।
सिर्फ़ चेहरे पर नकाब लेकर ही मिलने आएंगे।
जादूगर के पोशाक और गिरगिट भी शर्मिंदा है।
इतने रंग बदलने वाले अब सबको रंग लगाएंगे।

एक रास्ता हूँ मैं, जब मुझसे गुजर जाओगे।
फिर से मुझ पर ऐसे ही वापस ना आ पाओगे।
ये लोग जो अपने लगते हैं इन्हें पास ना पाओगे।
मेरे ना होने पर जब तन्हा होगे, तब ये ना आएंगे।
ये बस खराब मौसम की तरह गायब हो जाएंगे।

यूँ बदलते चेहरों की मुझको आदत हो चली थी।
अपनों को बदलता देखकर जान मेरी जली थी।
जिसके कारण मौत की मेरी ख़्वाहिश टली थी।
उसी ने हाथों से जाम दिया तो कैसे ठुकरायेंगे।
जाम में अगर जहर भी हुआ तो उसे पी जाएंगे।

हम जैसे तो हर गली कूचे में मिल ही जाते हैं।
इसलिए जैसे मिलते हैं वैसे खो भी जाते हैं।
गए तो मुँह ना दिखाएँ, रहें तो साथ निभाते हैं।
तुमने नज़रें बिछाई तो दिल की दुनिया सजायेंगे।
कहा अलविदा तो यकीन करो वो भी निभाएंगे।

तुमने लगाया था जो रंग वो अभी ज़िन्दा है।
मेरी ज़िंदगी का रंग, वो रंग रहने तक ज़िन्दा है।
तेरा साथी भी तो तेरे संग रहने तक ज़िन्दा है।
वादा था तुझसे कि ज़िंदगी भर साथ निभाएंगे।
जब खुद के पास ना रहे तो तुझे कैसे बुलाएंगे।

                                    सुधांशु श्रीवास्तव "जीत"

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