Tuesday, March 31, 2020

छत्तीसगढ़ से शैलेन्द्र चेलक की रचना- मानवता की मिसाल बनें।

नाम - शैलेन्द्र चेलक 
शीर्षक - मानवता की मिसाल बनें
पता - पेंडरवानी , बालोद , छ.ग.

    मानवता की मिसाल बनें

 चारो ओर फैली महामारी ,
 आयी है गंभीर बीमारी ,
 जन जन भय ग्रस्त हैं ,
  सारी दुनिया पस्त है ,
ऐसे में फिर कोई क्यूँ तने ? 
मानवता की मिसाल बनें ।

अबाल वृद्ध है सशंकित ,
महामारी करते आतंकित ,
वैज्ञानिक , चिंतित शोध में लगे हुए हैं,
डॉक्टर रात रात भर जगे हुए हैं ,
फिर क्यूँ हम सवाल बनें ,
मानवता की मिसाल बनें ,

बढ़ते जाते मरीज जब- जब ,
अधीर होते जन -जीवन तब-तब ,
इस अधीरता से कुछ न होगा ,
गंभीरता से ही कुछ होगा ,
तब घर में रहकर खुशहाल बनें ,
मानवता की मिसाल बनें ,

दूर रहो गहमा - गहमी से ,
दूर रहो गलत- फहमी से ,
खुद की सुरक्षा खुद के हाथ है ,
पहले कहते थे ,फिर वही बात है,
जग में भारत कमाल बनें , 
हम मानवता की मिसाल बनें ,

देखो धर्म - मजहब काम नही ,
मानवता केवल नाम नही ,
सेवा करो जरूरतमंदों की ,
दो उनको , सोचो दाम नही ,
इस विपदा लोगों की मददगार हर हाल बनें ,
इंसानियत को जिंदा रखें , मानवता की मिसाल बनें ,
मानवता ........
   
            शैलेन्द्र कुमार चेलक
                   छत्तीसगढ़

6 comments:

  1. बहुत सुंदर कविता चेलक जी
    समसामयिक रचना

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  2. बहुत खूब भाई, बहुत अच्छी रचना।

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  3. स्वागत है सर

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  4. आप सभी का आभार

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  5. आप सभी को धन्यवाद

    ReplyDelete

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