शीर्षक - मानवता की मिसाल बनें
पता - पेंडरवानी , बालोद , छ.ग.
मानवता की मिसाल बनें
चारो ओर फैली महामारी ,
आयी है गंभीर बीमारी ,
जन जन भय ग्रस्त हैं ,
सारी दुनिया पस्त है ,
ऐसे में फिर कोई क्यूँ तने ?
मानवता की मिसाल बनें ।
अबाल वृद्ध है सशंकित ,
महामारी करते आतंकित ,
वैज्ञानिक , चिंतित शोध में लगे हुए हैं,
डॉक्टर रात रात भर जगे हुए हैं ,
फिर क्यूँ हम सवाल बनें ,
मानवता की मिसाल बनें ,
बढ़ते जाते मरीज जब- जब ,
अधीर होते जन -जीवन तब-तब ,
इस अधीरता से कुछ न होगा ,
गंभीरता से ही कुछ होगा ,
तब घर में रहकर खुशहाल बनें ,
मानवता की मिसाल बनें ,
दूर रहो गहमा - गहमी से ,
दूर रहो गलत- फहमी से ,
खुद की सुरक्षा खुद के हाथ है ,
पहले कहते थे ,फिर वही बात है,
जग में भारत कमाल बनें ,
हम मानवता की मिसाल बनें ,
देखो धर्म - मजहब काम नही ,
मानवता केवल नाम नही ,
सेवा करो जरूरतमंदों की ,
दो उनको , सोचो दाम नही ,
इस विपदा लोगों की मददगार हर हाल बनें ,
इंसानियत को जिंदा रखें , मानवता की मिसाल बनें ,
मानवता ........
शैलेन्द्र कुमार चेलक
छत्तीसगढ़
बहुत सुंदर कविता चेलक जी
ReplyDeleteसमसामयिक रचना
बहुत खूब भाई, बहुत अच्छी रचना।
ReplyDeleteVery nice sir jii
ReplyDeleteस्वागत है सर
ReplyDeleteआप सभी का आभार
ReplyDeleteआप सभी को धन्यवाद
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