शीर्षक-गर पुस्तक न होती तो क्या होता?
राज्य-छ.ग.,जिला-महासमुन्द
मोबा.- 8103535652
9644035652
चिंतन करें,मनन करें,गर पुस्तक न होती तो क्या होता।
क्या इंसान आदम ही रहता,क्या वो सभ्य जीवन जीता।।
गर पढ़ने के साधन न होते।
तो क्या हम यहाँ पर होते।।
स्कूल जाते,बस सुनते,पढ़े हुए को कैसे गुनते।
क्या बच्चों का जीवन,कभी विवेकानंद से संवरते।।
शारीरिक विकास होता, मानसिक विकास अवरुद्ध हो जाता।
बिन पुस्तक क्या पढ़ते हम,आने वाली पीढ़ी को क्या सुनाता।।
पुस्तकें ज्ञान का भंडार है।
पुस्तकों में समाया संसार है।
पुस्तकें जीवन का आधार है।
पुस्तकों में ज्ञान,विज्ञान,विचार है।।
पुस्तकों में समग्र ज्ञान है।
पुस्तक से बने कितने महान हैं।
पुस्तक सफलता की कुंजी है।
पुस्तकों का ज्ञान अमूल्य पूँजी है।।
पुस्तक क्यों पढ़े या क्यों है जरूरी इसे पढ़ना।
पुस्तक बिना न मार्ग,न है आसान आगे बढ़ना।।
मधुर मनुज मिट्टी है,पुस्तक शिल्पकार है।
सोच का आधार,पुस्तक जीवन का आकार है।।
सुन मधुर पुस्तक व्यक्तित्व विकास से सरोकार है।
कल्पना,चिंतन,मनन का पुस्तक ही आधार है।।
सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
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