राज्य- छत्तीसगढ़
शीर्षक- *आन मिलो सजना*
रवि- रश्मियों का नभ से
तेजस जब क्षीण हो जाता,
समस्त जगत में तब-तब
तमस का भान कराता ।
सूर्यास्त की बेला देख
कवि नित सृजन करे,
विरही हिया हूक बढ़े,
देख छटा विछोह की
रश्मि मन डोल डरे,
पथ सूना ,सूनी डगर
सूना जग, नज़र आता।
खगचर लौटे नीड़ अपनें
भानु-सौन्दर्य नित लुभाता।
वृक्षों की छांँव घनेरी,
मन्द -मन्द मुस्काये पवन
डाल गलबहियाँ अरे!
ड़ाल -ड़ाल मिली
मुझको चिढ़ाती बैरन ।
ढ़लती जाये बेला,
ढ़लती जाये जिन्दगानी
अब तो आन मिलो सजन
अब तो आन मिलो सजन।।
✍रश्मि विपिन अग्निहोत्री
केशकाल जिला कोण्डागाँव
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