Monday, March 16, 2020

छत्तीसगढ़ से नलिनी बाजपेयी की रचना- नारी

कवियित्री - नलिनी बाजपेयी
       शीर्षक   *नारी*
राज्य का नाम  - छत्तीसगढ़
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नारी तुम श्रद्धा हो,
विश्वास हो,
संसृति का गौरव 
और अभिमान हो।

तुम सृष्टि निर्मात्री 
तुम धरा की शान हो,
क्या गुण गाऊँ 
तुमने रचा सब विधान है।

विश्वस्वरूपा ममतामयी 
जग कल्याणी,
तुम ही माँ, बहन 
भार्या और अर्धांगिनी।

तेरी महिमा क्या गाऊँ 
तुम जग जननी भवानी,
तुम बिन अपंग है अपूर्ण है
 तुम जग कल्याणी।

जाति ,धर्म,लिंग में 
ना बाँटो ,               
इतिहास बदलने वाली है 
नारी हिंदुस्तानी।

मैं सीता,राधा,
मैं लक्ष्मी मीरा,         
 शक्ति स्वरूपा 
और असुरसंहारी।

न चरणों की दासी,
ना बेचारी,
बन गई अब दृढ़ ,
कठोर सबला नारी।

परिवर्तक हूँ, परिचायक हूँ,
पत्थर पर रेखा खिंचने वाली
परिवर्तन की चिंगारी हूँ।

कभी रौंदी गई 
कभी जला दी गई,
कहने को आजाद 
मगर तुमसे नहीं हूं हारी।

समर्पित हूं ना दिखाना 
पुरुषत्व का अहं,
मुझे ना तौलना 
बन रूप पुजारी,

फूल सुकुमारी ना समझ,
बन जाऊंगी वक्त आने पर 
करवाल दुधारी।

नारी तुम श्रद्धा हो,
विश्वास हो,
संसृति का गौरव 
और अभिमान हो।

    नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर (छ. ग.)

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