शीर्षक: इतनी शक्ति दो माँ
राज्य: असम
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संकट आन पड़ी है,
मैय्या से आस बड़ी है,
हिम्मत न हम हारें,
इतनी शक्ति दो माँ ।
जग पे भारी करोना,
जल्दी आ देर करो ना,
हम सब हैं तैयार,
साथ सभी का दो माँ।
घर से पूजा करेंगे,
बाहर न निकलेंगे,
वादा किया वतन से,
मुझको माफी दो माँ।
जो अपनों से है दूर,
मिलने को मजबूर,
रहें सुरक्षित सारे,
ऐसा ही वर दो माँ ।
✒ *विनय कुमार 'बुद्ध', न्यू बंगाईगांव, (असम),
Bahut achii kavita...kavi ji...
ReplyDeleteधन्यवाद
ReplyDeleteVery nice
ReplyDeleteSunder hai
ReplyDeleteDhanyvaad
Deleteकॉरोना वैश्विक महामारी जैसे ज्वलंत मुद्दे पर अत्यंत सहज तरीके से रचित ये पंक्तियां आत्मसंकलप और संयम को बता रही। उत्कृष्ठ रचना
ReplyDeleteप्रतिक्रिया के लिए हृदयतल से आभार
DeleteVery nice
ReplyDeleteThanks
DeleteSir very nice poem
ReplyDeleteThank u dear
Deleteबहुत सुन्दर रचना है ❤❤❤❤❤
ReplyDeleteबहुत सुन्दर रचना है.....महाशय !
ReplyDeleteधन्यवाद
DeleteBahut Achhi Hai
ReplyDeleteधन्यवाद आपका
DeleteBBAHAT AACHA HAY SIR
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