शीर्षक - सरस्वती वंदना
राज्य - राजस्थान
संपर्क सूत्र - 9001019002
,,,,,,,,,,,,,,,,,, सरस्वती वंदना ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
श्वेताम्बर धारिणी,
हंस - मोर वाहिनी।
आदिशक्ति अवतरित,
तमाकर संहारिणी।।
वीणा वेद कर शोभित ,
चतुर्भुज स्वामिनी।
सृष्टि नीरवता में ,
मधुर स्वर संचारिणी।।
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माघ शुक्ल पंचमी,
श्री कृष्ण वरदायिनी।
उल्लसित जल - थल ,
मधुर स्वर गामिनी।।
सकल चराचर,
भव -सागर तारिणी।
सृष्टि -- नियंता,
सह -धर्म -चारिणी।।
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ज्ञान हीन मानहीन
"सृजन " बखानी जानि।
अज्ञ कालिदास, वरद,
वोपदेव भी बने ज्ञानी।।
हे वाक्देवी शारदे !,
शतरूपा वीणापाणि।
चरणन में निज धर,
स्नेहाशीष दे कल्याणी।।
जयति जय जय माँ सरस्वती
ReplyDeleteहार्दिक आभार
Delete👍👍👍
ReplyDelete👍👍👍👍👍
ReplyDeleteगागर में सागर भर दिया आपने
ReplyDeleteश्रीमन विद्या की असीम सरिता वाक् देवी के सम्मान व ऐश्वर्य को शब्दबद्ध करने की मुझ तुच्छ प्राणी में इतनी विद्वता नहीं फिर भी एक छोटा सा प्रयास किया है।
DeleteNice lines
ReplyDeleteNice line sr ji
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