राज्य -पश्चिम बंगाल
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शीर्षक-"गरीब"
अगर देखा जाय तो
गरीबी में बहुत मजा है
गरीबी कितनी मस्त-मस्त है
न जीने की चिंता
न मरने का डर
न रहने की फ़िकर
न शुगर
न ब्लडप्रेशर
न पेट खराब
न नियत खराब
न कोई टेंसन
न कोई पेंसन
न गर्मी से डर
न जाड़ा से भय
मगर ठिठुरेंगे जरूर
ये है एकदम तय
न मान की इच्छा
न सम्मान की चाहत
न बेइज्जती का दुःख
न सत्कार का सुख
न बिस्तर की कामना
न चादर से सामना
न नींद के लिए लोरी
पर हर दिन गावत होरी
दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश" कलकत्ता
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