शीर्षक - *घर वास,कोरोना हताश*
राज्य - -छत्तीसगढ़
🌾 *घर वास कोरोना हताश* 🌾
घर वास
कोरोना हो गया हताश,
सावधानियां बरते
कभी न आएगा पास।
अर्थ-व्यवस्था
कर बैठा नाश,
एक तरह का परमाणु
युद्ध का है आगाज।
मगर इससे जीत
लेंगेहै विश्वास।
विकास का दौर थमा ,
नर हो न निराश।
कुछ दिन धैर्य रखें,
घर रहें
आएगा फिर
मधुमास।।
प्रशासन का सहयोग
करे आज,
कोरोना को भारत
आएगा ना रास।
चीन की काली
करतूत का खुला राज,
उसे विश्व गुरु के साहस
का होगा एहसास।
चंद दिनों में निकलेगी
कोरोना की लाश,
स्वस्थ्य देश ,स्वच्छ
परिवेश के होगा एहसास।
घर वास ,
कोरोना
हो गया हताश।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर कांकेर (छ.) ग.
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