Tuesday, March 24, 2020

छत्तीसगढ़ से नलिनी बाजपेयी की रचना- ललकार

कवित्री-नलिनी बाजपेयी
शीर्षक - ललकार
राज्य - छत्तीसगढ़
मो.न.-
          ललकार

आज इतिहास लिखा गया 
स्वर्णिम शब्दों से,
मिला निर्भया को न्याय
श्रद्धांजलि अर्पित अश्कों से।

ललकारती हूँ तुम्हें दरिन्दों,
बुरी नजर से मत देखना
आक्रोशित नजरों से ही 
भस्म कर जाऊँगी।

सब कुछ सहती रही 
अब ना सह पाऊँगी,
न्याय मुझे आज मिला
हक के लिए लड़ जाऊँगी।

बेटी,बहना भार्या 
बन फिर मैं आऊँगी,
बुरी नजर जो डाले, 
रणचंडी बन जाऊँगी।

तुम दरिंदे थे,
किया दरिंदगी ,
न्यायालय ने दी फांसी 
ये जग को समझा जाऊंगी।

सहन सीमा 
अथाह असीम था,
अब मर्यादा तोड़ी तो 
ज्वाला बन जाऊंगी।

मुझे अब कमतर 
ना समझना,                  
 ये सीख सबको 
सीखा जाऊँगी।

जग बदला लाज 
हया त्याग अब ,
गर डाली कुदृष्टि 
तुम्हें पौरुषहीन बना जाऊंगी।

श्रुति,वेद,पुराणों 
सब ने मेरी शक्ति गाई है,
असुरों का संहार की गाथा 
फिर दुहराऊँगी।

जिसने शीलभंग 
की सोची,
सर काट कच्चा 
उसे चबा जाऊंगी।

मैं अबला,जरा,बंजर 
अब ना कहलाऊंगी,
अब फिर महिषासुर मर्दिनी,
रणचंडी कालिका कहलाऊंगी।

आज इतिहास लिखा गया 
स्वर्णिम शब्दों से,
मिला निर्भया को न्याय
श्रद्धांजलि अर्पित शब्दों से।
_ _ _ _ _ _ _ _ _ _ 

    नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर (छ. ग.)

1 comment:

  1. Mahila Shakti ko jagrit Karne ki prerna dayak achhi Kavya hai.Mubarak ho.

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