Monday, March 16, 2020

छत्तीसगढ़ से परमानंद निषाद की रचना- आईना

नाम- परमानंद निषाद
राज्य- छत्तीसगढ़,जिला- बलौदा बाजार
विषय- आईना
मोबाइल- 7974389033

जब भी मै आईना देखूं,
तेरी तस्वीर नजर आती है।
तु मुझसे नाराज क्यों है,
क्यों दिखा रही हो आईना।
लोगो के चेहरे और मन को,
मन का आईना पढ़ लेता है।
 काश पढ़ पाता मेरे खामोशी को।
आईना हमको दिखा जाता है,
 मुस्कुराता हुआ वो चेहरा।
आईना साफ करके देखा करो,
हर सच्चाई नजर आयेगी।
जीवन मे हर कठिन राह,
हमको आईना दिखा जाता है।
मेरे घर का हर आईना,
तेरे सूरत के इंतजार मे।
आईना तेरे इंतजार मे,
टुकड़े-टुकड़े हो रहे है।
आईना दिखा जाता है,
चेहरे का हर दाग।
मन के हर आईना मे,
व्यवहार का स्वरूप मिले।।

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