जिला - खंडवा
नाम --कविता शरद विश्वकर्मा
शीर्षक- युद्ध
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छिड़ गया है युद्ध ,
आज फिर देश के सामने ,
हे समय प्रलयंकारी फिर
देश के सामने,
चीखती हैं दीवारे ,
और चीखते हैं शब्द सारे ,
हे तूफान जबरदस्त फिर
देश के सामने है ,
है समय फिर प्रलयकारी
देश के सामने
और तोड़ती हैं जोड़ती हैं
स्थितियां देश की
हे तूफान जबरदस्त
फिर देश के सामने
ना हो ध्वस्त आकांक्षाएं
नागरिकों की
हे अभी साहस और
जटिलता फिर देश के सामने
सोचते हैं कर ही डाले
अब नया सूरज उदय
हे कर्मवीर योद्धा हे
कर्मठ वीर हे देश के पास मे
कविता शरद विश्वकर्मा
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