राज्य- राजस्थान
शीर्षक- सुरबाला
एक आखरी शराब कि बोतल
पिला,ए सुरबाला।
फिर मैं कभी न आऊं मधुशाला,
पीते-पीते मधु,मैं थक गया हूँ,
आज पिला दे मुझे आखरी प्याला,
तू यंही रहेगी सुरबाला,
यंही रहेगी मधुशाला,
नहीं रहेगा तो तुझे ये पीने वाला,
आज तक तुझे पी-पीकर होता था मतवाला,
आज ऐसा क्या किया?कि मैं हूँ छोड़ने वाला,
कुछ न हूं, मैं आज समझने वाला,
तेरा हर जादू आज तक ही,ए सुरबाला
आज के बाद न आयेंगे मधुशाला,
तू ढूंढ कोई नया मतवाला,
आज जा रहे हैं, ए सुरबाला
तुझे हमेशा याद रखेंगे,ए मधुशाला
अलविदा मधुशाला,
अलविदा सुरबाला।।।
यहीं होगी मधुशाला,
यहीं रहेगी सुरबाला,
कल शाम फिर आएगा तू,ए पीने वाला।
नशा जब भी तेरे सिर चढ़ के बोला,
हर दिन आखरी जाम पर तू ये बोला,
ये है मेरा आखरी प्याला,
पिला दे ए सुरबाला,
लगता है आज फिर मधुबाला ने धमकाया है,
इस कारण होश तुझे आज आया है,
मैं सुरबाला हूँ, ए पीने वाला
ऐसे ही मेरे मोह जाल से तू न छूटने वाला,
मैं तेरे सारे गमों को भुलाती,
जब संसार-सागर तुझे डुबाता,
तू मुझे पुकारता,
मैं तुझे उबारती,
तेरे हर आत्महत्या प्रयास जीवन मे बदलती,
तुझे जीने का सहारा देती,
ए पीने वाला।
फिर तुझे आज कैसे याद आई, तेरी मधुबाला
यंही होगी मधुशाला,
यंही रहेगी सुरबाला,
कल शाम फिर आएगा,
तू ए पीने वाला।
तेरे सारे ग़मो को झेलेगी ये सुरबाला,
तू रह दीवाना बनकर,जब तक है मधुशाला
इस मधुशाला में बड़े-बड़े राजनेता आते,
तुझमे ओर उनमे फर्क है इतना,
कि तुम दिन-दहाड़े आते,
वो चोरी-छिपे आते,
तुम मधुबाला के सामने आते,
वो किसी गैर सुरबाला के साथ आते,
फिर क्यों जा रहा है तू,
आज छोड़कर मधुशाला,
यंही रहेगी सुरबाला,
यही रहेगी मधुशाला,
कल शाम फिर आयेगा, तू ए पीने वाला।।
आज मैं बहका नहीं हूं,
पूरे होश-हवास में बोल रहा हूँ,
अलविदा मधुशाला, अलविदा सुरबाला।
मेरा जब भी नशा उतरता,मुझे याद आती मधुबाला
मधुबाला को पास न पाकर,मैं चला आता मधुशाला
तू कोमल हाथों से पिलाती शराब का प्याला,
मैं तुझमें खो जाता,ए सुरबाला
अब लौट आई, मेरी मधुबाला
अब मैं न पिऊंगा ये हाला,
हाल क्या बना लिया है, पी पीकर हाला,
हालत तेरी अच्छी नहीं है बोली मधुबाला,
अब मुझे सम्भालने वाली आ गईं मधुबाला,
तो मैं क्यों आऊं तेरे पास ए सुरबाला,
पूरे होश-हवास में बोल रहा हूँ,
अलविदा मधुशाला, अलविदा सुरबाला।
तुझे अलविदा कहने मैं चला आया मधुशाला,
तेरे कोमल हाथों से पीने लगा हाला,
तूने सोचा बहक गया है, पीने वाला
बहका करता था, मैं इतने दिन आकर मधुशाला
लेकिन चढ न पाई आज तेरी हाला,
शायद मेरे दिलोदिमाग में चढ़ गई मधुबाला,
इस कारण बेअसर हो गई हाला,
बोतल पर बोतल पीकर भी आज होश में है ,पीने वाला
न जाने कितने दिन खोये,आकर मधुशाला
तब जाकर आई मेरी मधुबाला,
अब उसे कैसे खो दूँ, सुरबाला
पूरे होश-हवास में बोल रहा हूँ,
अलविदा मधुशाला, अलविदा सुरबाला।
मधुबाला कि सुंदरता का बखान कैसे करूँ?सुरबाला
तू भी उसे देखकर ईर्ष्यावश पीने लगेगी हाला,
उसकी आंखें है शराब का प्याला,
उसके कपोल सेब-से लाल,
उसकी गर्दन बोतल कि नाल,
उसके होंठ अनार दाने-से लाल,
उसका रंग सुनहरे भुना चना-सा,
उसके अंग अंग में सौंदर्य का सोता,
मधुबाला नहीं वो है पूरी की पूरी मधुशाला,
तो फिर मैं क्यों आऊं? मधुशाला
पूरे होश- हवास में बोल रहा हूँ,
अलविदा मधुशाला, अलविदा सुरबाला।।।
कँहा थी इतने दिन?तेरी मधुबाला,
आज कैसे लौट आई तेरी मधुबाला,
जब दुनिया ने ठुकराया,असफलता ने घेरा डाला,
तब कँहा थी?तेरी मधुबाला,
तू फिरता मारा-मारा, सहारा दिया मधुशाला ने,
तेरे बहते आंसू पोंछे सुरबाला ने,
सारा प्रेम लूटे मधुबाला,
यह कैसा न्याय?पीने वाला,
आज कैसे लौट आई तेरी मधुबाला।
दुःख दर्द में याद आये सुरबाला,
प्रेम लूटे मधुबाला,
अरे वाह,रे वाह, पीने वाला,
सुरबाला के दर्द को कोई न समझने वाला,
तू बहका नहीं मुझे भी पता है,
इंसान सच बोलता है पीकर हाला,
तेरा असली चेहरा सामने आया ए पीने वाला,
आज कैसे लौट आई तेरी मधुबाला।
यँहा तो आयेगा कोई नया मतवाला,
तू तो सम्भाल तेरी मधुबाला,
मंदिर-मस्जिदों, दफ्तरों में इंसान लूटता,
इंसान चैन से सोता,झूमता
वो है मधुशाला
आबाद है आबाद ही रहेगी मधुशाला।
एक ओर एक प्याला चिल्लाये पीने वाला,
उठ कर चले,पैर डगमगाये तो सम्भाले सुरबाला,
सम्भालना ही काम है सुरबाला का,
सहारा देना ही काम है मधुशाला का,
फिर भी समाज कि नजर में गिर जाए सुरबाला,
चोरी-छिपे पंडित ,विद्वान भी आये मधुशाला
पी-पीकर मस्त हो जाये,
दिन दहाड़े प्रवचन दे जाये,
वो चिल्लाये गन्दी है सुरबाला,
बुरी है मधुशाला,
अरे वाह,रे वाह,पीने वाला
इतनी बुरी लगती है सुरबाला ,
तो फिर क्यों आते हो?मधुशाला,
आज कैसे लौट आयी तेरी मधुबाला!!!
Good
ReplyDeleteअति सुन्दर
ReplyDeleteअति सुन्दर काकोसा हुक्म(nimera सरदार)
ReplyDelete