राज्य:- छत्तीसगढ़
शीर्षक- नारी
हुँ मैं नारी...
दूर बैठी... तिनकों पर,
पास से लगे बैठी सिंहासनों पर,
कहीं अबला, कहीं सबला...
पर जरूरत है मुझे ज्यादा तेरी,
तू है सबल, कहीं नहीं अबल...!
जब आ जाऊँ अपने रूप में,
जब मेघ गर्जन करे,
जब वर्षा तेजी से बढ़े।
या तो आ जाये प्रलय,
या छाये हरितिका...!
हूं मैं नारी..!!
हूं मैं नारी...!!
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