Tuesday, February 11, 2020

छत्तीसगढ़ से एस के नीरज की रचना- हमने उनको बदलते देखा है

रचनाकार :- एस के नीरज
राज्य :- छत्तीसगढ़
संपर्क :- 99770-45540
शीर्षक :- हमने उनको बदलते देखा है ...

बदलते मौसम की क्या बात करें 
हमने खुद उनको बदलते देखा है 
जिनके पांव कभी जमी पर न थे 
आज उन्हें नंगे पांव चलते देखा है !

रिश्तों में गिरावट की क्या बात करें 
गिरगिट को रंग बदलते देखा है 
कल तक जिनको दम भरते देखा था 
उन्ही को आज नजर चुराते  देखा है !

जो सपने देखते थे अफसर बनने का 
उन्हें चपरासी  तक बनते देखा है 
दफ्तर का चक्कर काट काट कर 
नौकरी के लिए गिड़गिड़ाते  देखा है !

सफ़ेद उजले  वस्त्र धारण  कर जिन्हे 
काले कारनामे भी करते देखा है 
बदलते मौसम की क्या बात करें 
हमने खुद उनको बदलते देखा है  ।

मौलिक और स्वरचित -  एस के नीरज

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