Tuesday, February 11, 2020

राजस्थान से बजरंग दान चारण की रचना- कान्हा चले आओ एकबार

कवि का नाम   बजरंग दान चारण 
राज्य  राजस्थान
 निवासी - नाथूसर ,बीकानेर 
कविता का शीर्षक  -   कान्हा चले आओ एकबार। 
मोबाइल नम्बर 8949410152

माँ यशोदा करे पुकार
 कान्हा चले आओ एक बार 
 करने अबला का उद्धार
 कान्हा ले लो तुम अवतार 

कालिए नागों का कहर बढ़ने लगा
 यह कलियों के जीवन को डसने लगा इसकदर इज़्ज़त पर जहर चढ़ने लगा
देखो दरिंदों का दुस्साहस बढ़ने लगा 
कान्हा करुणा सुनके
 कलियों को बचा लीजिए 
इस उपवन की
 खुशबू भी बचा दीजिए 
टूटा कष्टों का पहाड़ 
उमड़ रहा पीड़ा का पारावार
 मां यशोदा करे पुकार 
कान्हा चले आओ एक बार

 करुणानिधि  कृष्ण कहां चले गए तुम देखो द्रौपदी की साड़ी खींची जा रही करुणा कर करके केशकर्णिका कह रही मगर पौरुष की गर्दन झुकी जा रही दुशासन का दुस्साहस बढ़ता जा रहा
 भरे बाजारों में द्रौपदी लूटी जा रही
 देखो बरसती आंखें
 तरसती है तारणहार को
  कान्हा बचा लो तुम 
राखी  के त्योहार को
 मां यशोदा करे पुकार 
कान्हा चले आओ एक बार 

अब  बगिया की हर तुलसी सहमने लगी रास्ते चलती आबरु जिंदा जलने लगी सितम सुन सुन हर चिड़िया सिसकते लगी देखो सोते-सोते सपनों में झिझकने लगी  यहां अबला हो रही बेहाल 
उजड़ गया सपनों का संसार
 मां यशोदा करे पुकार
 कान्हा चले आओ एक बार 

 देखो पीट-पीटकर सिर और छाती सोनचिड़ी आंसू बरसा रही है 
अगले जन्म साईं बेटी ना किज्यो 
डरकर के बेचारी देन्य दरसा रही है 
कान्हा आकर के अबला बचा लीजिए
 अब धरा पर मानवता मरी जा रही 
बिलक बिलक कर कर कृष्णा करे पुकार कान्हा चले आओ एक बार 

कहीं कंस का कहर 
कहीं कालिए का जहर 
शर्मिंदा हर शहर 
डर रहा हर प्रहर 
तेरे वृंदावन की हर बाला डरी जा रही
 अब इस उपवन की आत्मा मरी जा रही कान्हा कंस और कालिए को सजा दीजिए बिलखती गोपियों को कान्हा बचा लीजिए सुनकर दुष्टों की दुत्कार 
कान्हा चले आओ एक बार 
सुन के चारण की फरियाद 
कान्हा चले आओ एक बार

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