शीर्षक-सफर
राज्य-छत्तीसगढ़
न चलते राही से
पूछो कि सफर में
दूरी कितनी है।
न थकते राहगीरों से
पूछो कि सफर में
मजबूरी कितनी है।
न बढ़ते मांझी से
पूछो कि पतवार में
ताकत कितना है।
न थमते नौका से
पूछो कि मझधार में
ख़ामोशी कितनी है।
न शांत सागर से
पूछो कि लहरों में
ज्वार कितना है।
न उछलते लहरों से
पूछो कि उछाल में
जलराशि कितनी है।
पूछो तो सिर्फ
अपने आपसे कि
तय करने को *सफर*
खुद में साहस
कितना है।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर
No comments:
Post a Comment