Wednesday, February 19, 2020

छत्तीसगढ़ से एस के नीरज की रचना- राहें

एस के नीरज
छत्तीसगढ़
99770-45540

शीर्षक - "राहें "
             *****

आसान नहीं है पकड़ना सच्चाई की राहें
लोग सोचते रह जाते हैं भरते हैं आहें ।

क्यों तलाश करता है तू परायों में अपना 
 एक बार बस  थामकर तो देख मेरी बाहें।

वजूद ढूंढ़ रहा है क्यों कभी इधर  कभी उधर
एक बार उठाकर तो देख ले सामने निगाहें ।

हर पल तलाश थी यहां से वहां तक पनाहे` 
इतना आसान नहीं है पकड़ना सच्चाई की राहें ।

    - एस के नीरज

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