राज्य - राजस्थान
शीर्षक - मानवता
मो.- 9772663818
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मानवता
देश प्रेम खो गया कहां पर,
क्यों मानवता बेहाल हुई ?
क्यों हिमगिरी है दहक गया,
क्यों यमुना है लाल हुई ?
क्यों मंदिर में चीत्कार उठी,
क्यों मस्जिदे बदहाल हुई ?
क्यों भीगा सलमा का आंचल ,
क्यों सीता कवलित काल हुई ?
क्यों बस्ती है सूनी सूनी,
घुला हवा में क्यों जहर?
क्यों लाशे है बिखरी बिखरी ,
क्यों बना शहर मुर्दों का घर ?
कहीं खून के प्यासे हमको,
क्यों मानव के झुंड मिले?
गली मोहल्ले चौराहों पर,
क्यों हमको नर मुण्ड मिले?
क्यों तलवारें चमक उठी,
क्यों भाले फरसे डोल गये ?
क्यों कबीर और बुद्ध के चेले,
नफरत की भाषा बोल गये?
क्या हम इतने सस्ते हो गये,
या गेरत को मार दिया?
या हमने इंसानी खाल में ,
असुरो का अवतार लिया?
देश में वर्तमान की परिस्थितियों को बहुत अच्छे से जाहिर करने पर आभार और शुभकामनाएं सा
ReplyDeleteशानदार सर
ReplyDeleteयथार्थ ,शानदार रचना
ReplyDeleteGreat going ...dear
ReplyDeleteNice poem
ReplyDeleteGreat...
ReplyDeleteसटीक...
ReplyDeleteमार्मिक...
वास्तविक...
उत्कृष्ट रचना
ReplyDeleteसर आपकी रचना बहुत ही सराहनीय है जो आज की वास्तविक परिस्थिति को बयां करती है
ReplyDeleteBhut sundar
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Deleteबहुत ही उत्कृष्ट रचना सर
ReplyDeleteबहुत ही सारगर्भित, समसामयिक और भावपूर्ण रचना है।
ReplyDeleteबधाई और धन्यवाद।
Sandar poem hkm
ReplyDeleteबहुत अच्छी रचना
ReplyDeleteआपकी रचना बहुत ही वास्तविक ओर विचारणीय पहलू को इंगित करने वाली है...
ReplyDeleteबहुत खूब
हरि राम बुरड़क
देश के वर्तमान हालात को बयां करती सटीक अभिव्यक्ति
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर रचना
ReplyDeleteबहुत खूब
ReplyDeleteबहुत बहुत खूब
ReplyDeleteआपसे हम सभी लोग ये ही आशा करते हैं
की ऐसे विचार हम लोगों तक पहुचाये
Nice sir
ReplyDeleteShandaar Rachna
ReplyDeleteNice..
ReplyDeleteVery nice
ReplyDeleteVery nice
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ReplyDeleteBhut aachcha
ReplyDeleteATI Sundar rachna
ReplyDeleteवर्तमान परिपेक्ष्य की सटीक एवं सारगर्भित रचना हेतु अशेष शुभकामनाएं
ReplyDeleteBahut sundar Rachana
ReplyDeleteWonderful and impressive words
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