Monday, March 2, 2020

राजस्थान से गोविन्द सिंह राव की रचना- मानवता

नाम - गोविन्द सिंह राव
राज्य - राजस्थान 
शीर्षक - मानवता
मो.- 9772663818
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             मानवता

देश प्रेम खो गया कहां पर,
क्यों मानवता  बेहाल हुई ?
क्यों हिमगिरी है दहक गया,
क्यों  यमुना है लाल हुई ?

क्यों मंदिर में चीत्कार उठी,
क्यों मस्जिदे बदहाल हुई ?
क्यों भीगा सलमा का आंचल ,
क्यों सीता कवलित काल हुई ?

क्यों बस्ती  है सूनी सूनी,
 घुला हवा में क्यों जहर?
क्यों  लाशे है बिखरी बिखरी ,
क्यों बना शहर मुर्दों का घर ?

कहीं खून के प्यासे हमको,
क्यों मानव के झुंड मिले?
गली मोहल्ले चौराहों पर,
क्यों हमको नर मुण्ड मिले?

क्यों तलवारें चमक उठी,
क्यों भाले फरसे डोल गये ?
क्यों कबीर और बुद्ध के चेले,
नफरत की भाषा बोल गये?

क्या हम इतने सस्ते हो गये,
या गेरत को मार दिया?
या हमने इंसानी खाल में ,
असुरो का अवतार लिया?

31 comments:

  1. देश में वर्तमान की परिस्थितियों को बहुत अच्छे से जाहिर करने पर आभार और शुभकामनाएं सा

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  2. यथार्थ ,शानदार रचना

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  3. सटीक...
    मार्मिक...
    वास्तविक...

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  4. उत्कृष्ट रचना

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  5. सर आपकी रचना बहुत ही सराहनीय है जो आज की वास्तविक परिस्थिति को बयां करती है

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  6. बहुत ही उत्कृष्ट रचना सर

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  7. बहुत ही सारगर्भित, समसामयिक और भावपूर्ण रचना है।
    बधाई और धन्यवाद।

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  8. बहुत अच्छी रचना

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  9. आपकी रचना बहुत ही वास्तविक ओर विचारणीय पहलू को इंगित करने वाली है...
    बहुत खूब
    हरि राम बुरड़क

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  10. देश के वर्तमान हालात को बयां करती सटीक अभिव्यक्ति

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  11. बहुत ही सुन्दर रचना

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  12. बहुत बहुत खूब
    आपसे हम सभी लोग ये ही आशा करते हैं
    की ऐसे विचार हम लोगों तक पहुचाये

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  13. This comment has been removed by the author.

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  14. वर्तमान परिपेक्ष्य की सटीक एवं सारगर्भित रचना हेतु अशेष शुभकामनाएं

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