शीर्षक- प्रगति
राज्य -छत्तीसगढ़
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प्रगति
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रास्ते कठिन है मगर
प्रगति पथ पर बढ़ना है,
आएंगी आपदाएं
मेरु सा अडिग रहना है।
मन में उत्साह लिए
वीरों सा अड़ना है,
गहनतम अंधियारे को चीर
दीपक सा जलना है।
सागर की लहरों से टकरा
पतवार बनना है,
प्रगति के राहों में
जल कुंदन सा निखरना है।
उतुंग शिखर सागर सम गहराई में
नव कलेवर बनना है।
मरुभूमि या कंटकाकीर्ण हो
नवल संसृति प्रजेता बनना है।
तिमिर भरा शुन्यपथ के
वीरानी से भी लड़ना है।
चाहे आए कितना भी संकट
आगे बढ़ना है।
प्रचंड समीर संग विकराल
अंगारों में भी हँसना है,
अभावों में पले कमियों को ना गिने
संग सबको ले चलना है।
यत्न करो,प्रयत्न करो
दृढ़ कामना करो,
निश्चित प्रगति से
हिमगिरि को जीतना है।
रास्ते कठिन है,
मगर प्रगति पथ पर बढ़ना है,
आएंगी आपदाएं
मेरु से अडिग रहना है।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर ,कांकेर (छ . ग)
बेहतरीन काव्य
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर कविता हैं
ReplyDeleteFine 👌👌🙏💐
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