पता - कसडोल , छ ग
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शीर्षक - हिन्दू - मुस्लिम एक है !
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अमन पसंद मेरे मुल्क में ,
नफरत का जहर घोला किसने ?
शुकूने - जिंदगी थी आदमियत में ,
तू हिन्दू - तू मुस्लिम बोला किसने ?
बनकर हमसाया चल रहे थे हम ,
अपनी - अपनी मंजिल की ओर ;
दरमियां हम दोनों के दुश्मनी का ,
फेंका मजहबीं शोला किसने ?
तेरा मकां भी , मेरा बसेरा भी !
प्रतिदिन निकलता ,नया सवेरा भी !
चाहे नाम जुदा हो हम दोनों का ,
ये हिन्द तेरा भी , ये हिन्द मेरा भी !
हम कतरा - ए - वतन हैं ,
धर्म के तराजू में हमें तोला किसने ?
चाहे तू अम्मां कहे , या मैं माँ कहकर पुकारूं !
तू अजान करे मस्जिदों में , मैं रोज आरती उतारूँ !
बता फर्क कहाँ हम दोनों के लहू में ,
रक्त बहता है वही , तू मुझे मारे या मैं तुझे मारूँ !
रब कहें या राम दोनों एक है ,
बांट दिया फिर हम दोनों का मौला किसने ?
अमन पसंद मेरे मुल्क में ,
नफरत का जहर घोला किसने ?
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