राज्य-पश्चिम बंगाल
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शीर्षक-"लम्बे हाथ"
कहते हैं लोग
कानून के हाथ
होते बहुत लम्बे
पर किनके लिए?
उन असहाय गरीबों के लिए
जिनकी संतानें
एक सुखी रोटी के लिए
पसारती है हाथ
जिनकी स्त्रियां
साड़ी तो क्या
पुराने फटे चिथड़े के लिए
तरसती है दिन-रात
या उनके लिए -
जो बैठ गए हैं कुंडली मार
खून पसीनों से उपार्जित
दूसरों के धन पर
या उन शोषकों के लिए
जो करते ईजाद
शोषण के नए रूप
या उन सफेद पोशों के लिए
जिनके दामन कालिमा से रंगे हैं
जो धन के बल पर
न्याय तो क्या
न्यायालय और
सारी व्यवस्था
खरीद कर
रख लिए हैं
अपने पॉकेट में ?
दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश" कलकत्ता
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