Friday, February 14, 2020

छत्तीसगढ़ से माधवी गणवीर की रचना- तलाश नहीं

माधवी गणवीर
राज्य - छत्तीसगढ़
गजल - तलाश नहीं

सुख का हर साज तो, मेरे पास नहीं,
पर मेरे साज की भी, तुझको आस नहीं।

पलकों के हिंडोले पर रक्खू चाहत तेरी,
ऐसी चाहत भी तुझको रास नहीं।

चमकेंगे जरूर एक दिन सितारे तुम्हारे भी,
वादों पर मेरे क्या तुमको विश्वास नहीं।
यादों का लिहाफ डाले तनहाई में अक्सर ,
ढूंढता वो तस्वीर,जो मेरे पास नहीं।

अब शाखो के सुर्ख चटकते फूल भी,
लगते क्यों मुझे वो, पलाश नहीं।

तमन्नाओं का जैसे कोई हिसाब नहीं,
अब जीवन में मुझे किसी की तलाश नहीं।


माधवी गणवीर

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