Saturday, February 1, 2020

छत्तीसगढ़ से डीसी त्रिपाठी की रचना- बसंत

डीसी त्रिपाठी  9893900105
रायपुर- छत्तीसगढ़ 

 #बसंत 
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   साजन तुम हो मेरे बसंत  ।
मेरी खुशियों के आदि अंत ।। साजन ( १ )

मैं प्यासी धरती सावन की ,
कब प्यास बुझेगी जीवन की।
बरसो बादल बनकर प्रियतम-
 भर दो उर में तुम नव उमंग ।। साजन ( २ )

ओढ़े सिर पर चूनर धानी ,
मौसम में मधुमास रवानी ।
फूटी कोपल यौवन जागा,
खुश्बू से महका दिग दिगन्त ।। साजन ( ३ )

देखो प्रकृति  नव निर्माण लिए ,
जीवन में नवल प्रभात लिए ।
धरती पर विखरी सुंदरता ,
कलियाँ मुस्कायीं मंद मंद ।। साजन ( ४ )

तुम हो तो जीवन में  है बहार,                      मेरी सांसे तुमसे मिलकर,
हो जाती है मलयज बयार ,.                                                            स्पर्श मिला तन से फूटी ,                            मधुरिम सुगंध ।।साजन।               ( ५ )

जीवन मे आया उजियारा ,
आलिंगन है कितना प्यारा ।
मन भ्रमर मधुर रस पान करे,
छायी नीरवता का हुआ अंत।। साजन (६ )

लाया अलसायी भोर #दिवाकर
बंद कुमुदिनी प्रेम रस पाकर ।
अब छोड़ मुझे तुम मत जाना,
मैं हूँ सजनी तेरी  तू मेरा कन्त।। ( ७ )

साजन तुम हो मेरे बसंत ।।

डीसी त्रिपाठी 
रायपुर- छस्तीसगढ़ ।

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