रायपुर- छत्तीसगढ़
#बसंत
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साजन तुम हो मेरे बसंत ।
मेरी खुशियों के आदि अंत ।। साजन ( १ )
मैं प्यासी धरती सावन की ,
कब प्यास बुझेगी जीवन की।
बरसो बादल बनकर प्रियतम-
भर दो उर में तुम नव उमंग ।। साजन ( २ )
ओढ़े सिर पर चूनर धानी ,
मौसम में मधुमास रवानी ।
फूटी कोपल यौवन जागा,
खुश्बू से महका दिग दिगन्त ।। साजन ( ३ )
देखो प्रकृति नव निर्माण लिए ,
जीवन में नवल प्रभात लिए ।
धरती पर विखरी सुंदरता ,
कलियाँ मुस्कायीं मंद मंद ।। साजन ( ४ )
तुम हो तो जीवन में है बहार, मेरी सांसे तुमसे मिलकर,
हो जाती है मलयज बयार ,. स्पर्श मिला तन से फूटी , मधुरिम सुगंध ।।साजन। ( ५ )
जीवन मे आया उजियारा ,
आलिंगन है कितना प्यारा ।
मन भ्रमर मधुर रस पान करे,
छायी नीरवता का हुआ अंत।। साजन (६ )
लाया अलसायी भोर #दिवाकर
बंद कुमुदिनी प्रेम रस पाकर ।
अब छोड़ मुझे तुम मत जाना,
मैं हूँ सजनी तेरी तू मेरा कन्त।। ( ७ )
साजन तुम हो मेरे बसंत ।।
डीसी त्रिपाठी
रायपुर- छस्तीसगढ़ ।
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