शीर्षक - विद्रोह के स्वर
राज्य - रुद्रप्रयाग उत्तराखंड
विद्रोह गर धर्म से है फिर ये आजादी किसकी है
प्रतिशत मापक बना, ज्यादा आबादी किसकी है।
तुम आवाज उठाओ वो तुम्हारा एक अधिकार है
ये देश तुम्हारा भी है यारों, ये बर्बादी किसकी है।
नादान से अपने मुल्क से प्यार किए जा रहे थे कि
ये भगवा - हरे रंग में फर्क करती खादी किसकी है।
असलियत से बेखबर चले अनजान राहों पर कि
बाराती बनकर तो आए है पर शादी किसकी है।
तोड़ मरोड़ की खबरें, अधूरा ज्ञान बांटती प्रेस कि
ये डिबेट करा कर मीडिया अपवादी किसकी है।
प्रशासन, कानून और बल से डर नहीं रहा गर तो
खूंटे पर लटकी, लाचार पड़ी खाकी किसकी है।
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