Thursday, January 23, 2020

छत्तीसगढ़ से सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- कल के गौरव-युवा

कवि- सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
राज्य- छत्तीसगढ़,जिला-महासमुंद
मोब.-8103535652
       9644035652
शीर्षक - *कल के गौरव-युवा*

हे युद्धवीर, हे शमशीर।
हे कर्मवीर, हे बलवीर।
माँ भारती की संतान हो।
ज्ञानी हो, बलवान हो।
भारत के गौरव मान हो।
माँ भारती के सम्मान हो।
तुम डटे रहे पहाड़ बन।
बढ़ते रहो शेर की दहाड़ बन।
कर्म तेरे मान हो।
धर्म तेरा सम्मान हो।
मर्म का तुम्हें ज्ञान हो।
न कभी अभिमान हो।
तुम धरा के वीर सपूत बन।
बढ़ते चलो अग्रदूत बन।
जब धरा धारा बने।
वेग सी उछाह हो।
कल की तुम राह हो।
देश की तुम चाह हो।

*सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"*

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