Thursday, January 9, 2020

छत्तीसगढ़ से स्वपन बोस की रचना- आशा

नाम श्री स्वपन बोस
पता जुगानी केम्प छत्तीसगढ़
मोबाइल 9340433481
शीर्षक आशाये 

          आशाये ।

आशा जीवन को आगे बढ़ाती है ।
कभी हंसाती ,कभी रुलाती है ।

                      पाने की चाह मन में लिये , यूं ही चलता जाता हूं ।
मृग मारिचा है ,सारा संसार ,हर पल धोखा ,खाता हूं ।

                    ‌सोचा था कल आज ख़ुश हो जाउंगा ,जब आज मेरे पास है , फिर कल की आशाये
दिल में लिये चलता हूं ।

              जीवन बीत जाती है 
                 अधुरी ,आशाये रह जाती है ।

               है छोटी सी आशा की हंस लूं ,पर जीन्दगी बड़ी रुलाती है ।

                   पल में सब देकर , फिर पल में छीन ,लेती है ।

                   लालच में फंसकर मक्खी गुड़ में जैसे रोता है ।
मनुष्य ,जगत आशा के जाल में फंसकर खुद को भुल जाता है ।

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