शीर्षक - हम क्यों लड़ रहे हैं
राज्य - छत्तीसगढ़
संपर्क - 99770-45540
कविता :-
कोई धर्म के नाम पर लड़ रहा है
कोई जाति के नाम पर लड़ रहा है
कोई राजनीति के लिए लड़ रहा है
मगर कोई इनसे पूछे तो सही कि
वो किस बात के लिए लड़ रहा है ।
कोई अपने हक के लिए लड़ रहा है
कोई अपनी मांग के लिए अड़ रहा है
कोई किसी बात को लेके बिगड़ रहा है
पर वजह पूछने की गलती की तो
वह हम सबसे ही क्यों भीड़ रहा है।
मंडी में आज अनाज सड़ रहा है
कोई किसी की नजर में गड़ रहा है
कोई किस को तमाचा जड़ रहा है
इन सबका कारण आखिर है क्या
कोई बेवजह किसी किसी को रगड़ रहा है।
कोई अपनी रुतबे पर अकड़ रहा है
कोई जंजीरों से किसी को जकड़ रहा है
कोई किसी बेगुनाह को पकड़ रहा है
ऐसा क्यों हो रहा है मेरे देश में आज
फिर भी राष्ट्र आज क्यों आगे बढ़ रहा है ।
आज नेता आपस में क्यों लड़ रहा है
धर्म का ठेकेदार आज क्यों बिगड़ रहा है
आज इंसान दौलत के पीछे दौड़ रहा है
स्वार्थ से भरे इन अनैतिक मूल्यों पर
आज इंसान ही इंसान से क्यों लड़ रहा है ...?
- एस के नीरज
Anyone
ReplyDeleteAnybody
No body