Thursday, January 9, 2020

राजस्थान से पवन गौतम बृजराही बमूलिया की रचना- बचपन

राज्य---राजस्थान।
रचनाकार-
पवन गौतम बृजराही बमूलिया।
सम्पर्क-9116488506
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बचपन (रचना)
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वो भी क्या बचपन था जिसमें 
       मोहक महक सुहाती थी!
सोंधी मिट्टी की खुशबू क्या 
           अद्भुत गंध बहाती थी!
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कभी नाव थी कभी पैरियाँ 
         कागद की बन जाती थी! 
मैरी दादी दिनभर 
          मेरे पीछे पीछे आती थी! 
दादा चाचा नाना नानी 
              एक कहानी कहते थे! 
परियों वाली लोरी गाकर 
          झिलमिल सपने बहते थे !

मोबाइल में खोया बचपन 
            पहले चिड़िया भाती थी! 
सोंधी मिट्टी की खुशबू क्या 
              अद्भुत गंध बहाती थी! 
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कहीं मार से रोता बचपन 
                कहीं टूटते सपने में!
कहीं गुबारें रोज बेचता 
            साँसे भर भर अपनेे में! 
कहीं कारखानों में पिसता 
               कूट कूट खैंचा जाता 
नौबत यहाँ तलक है देखो
              यहाँ वहाँ बेचा जाता! 

हाय! कहाँ है गुजरा बचपन 
       माँ मीठा गीत सुनाती थी! 
सोंधी मिट्टी की खुशबू क्या 
           अद्भुत गंध बहाती थी!
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कहीं बोझ बिस्तों से पिसता
       कहीं बिलखता बचपन अब! 
मैरे हिस्से की वो मस्ती 
         गायब है और पचपन अब! 
कंप्यूटर में उलझा बचपन
              लगता मानो शापित हो! 
कहीं गरीबी लगती घातक 
              कहीं सुविधा पातक हो! 

मुझको मैरा बचपन दे दो 
            नींद बहुत ही आती थी! 
सोंधी मिट्टी की खुशबू क्या 
             अद्भुत गंध बहाती थी! 
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एक दिन ऐसा हुआ याद है 
        मुझको बचपन का किस्सा !
मेरे बड़े भाई ले भागे 
               मेंरे जामुन का हिस्सा! 
मैं भी दौड़ा पीछे उनके 
                सारा घर ढूँढा खोजा!
मिले नहीं फिर बोली अम्मा 
        ले गौतम और  चुप हो जा! 

छिंयापताही, छीलकबड्डी 
         लंगड़ी बहुत खिलाती थी! 
सोंधी मिट्टी की खुशबू क्या 
              अद्भुत गंध बहाती थी! 
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शाब्दिक अर्थ 
छिंयापताही-
छिपने का खेल !
लंगड़ी-
पौआ, एक टांग से खेलना! 
छील कबड्ड़ी -
मुँह से बिना साँस लिये 
कबड्डी बोलना!
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पवन गौतम बृजराही बमूलिया।

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